सोमवार, 6 जुलाई 2009

स्वागतम्


ये गली का कोना है. स्वागत है आपका. आपने कई गलिया देखी होंगी, कुछ चौड़ी, कुछ तंग. इस गली में आयें और इसके कोने की छांव में थोड़ी देर गुजारे और चलते-चलते अपनी यादों और अहसासों को कुछ समेटते और बिखेरते हुए जायें. हड़बड़ी में हो तो रुक कर सांस ले लें और फूर्सत में हो तो कोने की एक चाय हो जाय.