सोमवार, 6 जुलाई 2009

स्वागतम्


ये गली का कोना है. स्वागत है आपका. आपने कई गलिया देखी होंगी, कुछ चौड़ी, कुछ तंग. इस गली में आयें और इसके कोने की छांव में थोड़ी देर गुजारे और चलते-चलते अपनी यादों और अहसासों को कुछ समेटते और बिखेरते हुए जायें. हड़बड़ी में हो तो रुक कर सांस ले लें और फूर्सत में हो तो कोने की एक चाय हो जाय.

3 टिप्‍पणियां:

  1. बंधु गलियां कई है, आप कम से कम अपनी गली का नाम पता भी तो बताये, नहीं तो कहीं पता भटक गया तो दूसरी गली में पहुंचने के खतरें हैं.

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  2. सच में भई ऐसी गली पहली बार देखा है। बहुत खुशी हो रही हैं आपकी इस अजनबी गलियों में घुम कर। वैसे तो इसी तरह की अजनबी गलियों में घुमने से चाय क्या सब कुछ मिलेगा।

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